Jyotish Shastra: के 5 ऐसे नियन कलयुग में पूजा करने के
रोज पूजा कैसे की जाती है Jyotish Shastra|
Jyotish Shastra अनुशार रोज पूजा अपने धार्मिक और आध्यात्मिक साधना का हिस्सा है. इसे अनेक धार्मिक संस्कृतियों में विभिन्न रूपों में किया जाता है. यहां मैं एक सामान्य तरीका बता रहा हूं|
जो हिन्दू धर्म में आमतौर पर प्रचलित है|
लेकिन धार्मिक अनुष्ठान में विभिन्नताएं होती हैं|
स्नान (शौच): पूजा करने से पहले शुद्धि के लिए स्नान करें. ये आत्मा को और भगवान की पूजा को पवित्र बनाता है।
पूजा स्थल की तैयारी: एक शांत, स्वच्छ, और पवित्र स्थान तैयार करें. जहां आप पूजा करना चाहते हैं।
सामग्री: भगवान की मूर्ति या चित्र, पूजा थाली, दीपक, अगरबत्ती, कुमकुम, चावल, फूल, फल, नैवेद्य (आहार), कलश, गंगाजल आदि|
समय: पूजा का समय सुबह या शाम का होता है. जो आपकी आध्यात्मिक आदतों और व्यापारों के साथ अनुसूचित होता है।
मंत्र जाप और ध्यान: भगवान की पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करें. और ध्यान करे।
आरती: भगवान की आरती गाएं. और उनकी प्रशंसा करें।
प्रणाम और भक्ति: अपनी भक्ति और प्रेम के साथ भगवान को प्रणाम करें।
प्रार्थना और धन्यवाद: अपनी मांगें और प्रार्थना करें. और भगवान का आभार व्यक्त करके उन्हें धन्यवाद करे।
संकल्प: अपने मन में एक संकल्प ले. आप आज की पूजा के बाद. धार्मिक और नैतिक रूप से कैसे जीवन जीएंगे।
पूजा समाप्ति: पूजा के बाद भगवान का ध्यान करते हुए. उन्हें अपने आप को समर्पित करें और पूजा समाप्त करें।

घर में रोज कौन सी आरती करनी चाहिए|
घर में रोज़ अपने आराध्य देवता की आरती की करे. जिससे उनको प्रशन्नता मिले. जिस भगवन को आप मानते है. सुबह पूजा के बाद आपको उनकी आरती जरुर करे |
पूजा करने के बाद क्षमा याचना कैसे करें|
पूजा के बाद क्षमा याचना एक महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक क्रिया है. जिससे व्यक्ति अपनी गलतियों के लिए माफी मांगता है|
कुछ सामान्य चरण हैं. जो आपको क्षमा याचना करने में मदद करेंगे. यत्पूजितं मया देव. परिपूर्ण तदस्तु मे.. अर्थात हे ईश्वर मैं आपका “आवाह्न” अर्थात् आपको बुलाना नहीं जानता है. न विसर्जनम् अर्थात् न ही आपको विदा करना जानता है. मुझे आपकी पूजा भी करनी नहीं आती है. कृपा करके मुझे क्षमा करें|
सुबह कितने बजे तक पूजा कर लेनी चाहिए |
सूर्योदय का समय सभी स्थानों पर सुबह की पूजा का समय सूर्योदय के बाद ब्रह्ममुहूर्त’ में होता है. कहा जाता है. इस समय मान्यता है. क्योंकि इसे ध्यान, प्रार्थना, और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.
ब्रह्ममुहूर्त का समय सामान्यत: सुबह के लगभग 1.5 घंटे या सूर्योदय तक होता है. इसमें रोज़ की उपचार पूर्वक गतिविधियों के लिए समय होता है.
जैसे कि नित्य क्रियाएं, पूजा, मंत्रजाप, आराधना और ध्यान. यह समय मानव जीवन को सकारात्मकता, और शक्ति प्रदान करता है.
कलयुग में कौन से भगवान की पूजा करने से पाप धुल जाते है|
हिन्दू धर्म में कलयुग में भगवान की पूजा करने से पापों का नाश होता है. और सात्विक गुण का विकास होता है. कलयुग में विशेष कर सत्ययुग की तुलना में मानव जीवन में अधर्म है.
और अनैतिकता बढ़ी हुई है. इसलिए धर्म, भक्ति, और सात्विक आचरण का महत्व और भी बढ़ गया है. कुछ भक्तिकालिन साहित्यों और पुराणों में कहा जाता है. कि कलयुग में भगवान श्रीकृष्ण के नाम परम सर्वोपरि हैं. उनकी पूजा से सारे पाप धुल जाते हैं. इस विचार में,”हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे” मंत्र का जाप चाहिए.
और भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए. कलयुगी लोगों के बीच में प्रचलित है. इसके अलावा, श्रीरामचंद्र और हनुमान जी की पूजा भी कलयुग में पापों का नाश करती है. भक्तिकालिन साहित्यों में उनका स्मरण, भजन, और पूजा का उल्लेख होता है. जो भक्तों को अध्यात्मिक साधना में मदद करता है। यह ध्यान रखें. कि इसके अलावा भगवान के विभिन्न रूप, देवताओं, और देवीयों की पूजा भी कलयुग में महत्वपूर्ण होती है. और उससे पुरुषार्थ, धर्म, और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता मिलती है।

हनुमान जी के दर्शन कितने बजे तक कर लेने चाहिए जिस से कलयुग में उद्धार हो सके|
हनुमान जी के दर्शन का समय व्यक्ति की आस्था और विशेष प्राथना के आधार पर है. हालांकि कुछ स्थानों और मंदिरों में विशेष समय होते है. हनुमान जी के दर्शन दिनभर किए जा सकते हैं. लेकिन कुछ विशेष समय और मुहूर्तों को बढ़ावा देते है।
मंदिरों का सामान्य समय: हनुमान मंदिरों में सामान्यत: सुबह और शाम के समय पूजा और आरती होती है. जिससे भक्त उनके दर्शन कर सकते हैं।
मंदिरों के विशेष समय: कुछ हनुमान मंदिर और स्थल विशेष मुहूर्तों में भक्तों के लिए खुले रहते हैं. जैसे शनिवार या मंगलवार इन दिनों हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व होता है।
शनिवार और मंगलवार: हनुमान जी को शनिवार और मंगलवार को पूजने का विशेष महत्व है. और इन दिनों भक्त उनके दर्शन करने के लिए अधिक समर्थ होते हैं।
तुलसी रामायण पाठ: हनुमान चालीसा. और तुलसी रामायण का पाठ भी विशेष रूप से मंगलवार को किया जाता है. और भक्तों को सुझाया जाता है. कि इस दिन इन्हें पढ़ना या सुनना अत्यंत फलदायक है।
समग्र रूप से, हनुमान जी के दर्शन का समय व्यक्ति की श्रद्धा. और साधना के साथ जुड़ा होता है. व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार विशेष समय. और तिथियों को चुन सकता है. और इसे नियमित रूप से अपनी आध्यात्मिक प्रवृत्ति का हिस्सा बना सकता है।

कलयुग में पूजा करने से पहले क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना|
कलयुग में पूजा करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखनी चाहिए. ताकि पूजा में श्रद्धा और पवित्रता बनी रहे|
सबसे पहले आप इस कामो को करें|
शौच और स्नान: पूजा के लिए शुद्धता महत्वपूर्ण है> इसलिए पूजा के लिए पहले स्नान करें।
ध्यान और समर्पण: मानसिक तैयारी के लिए ध्यान और समर्पण करें. अपने मन को शांति में लाने के लिए. पूर्व-निर्धारित समय में मानसिक तैयारी का समय दें।
पूजा स्थल की सजावट: पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखें. और पूजा के लिए आवश्यक सामग्री को सजाकर रखें।
पूजा सामग्री का सफाई से पूर्व: पूजा सामग्री को साफ करें.और विशेष रूप से मूर्ति या चित्र को साफ करें।
आत्म-शुद्धि: पूजा के लिए आत्म-शुद्धि के लिए. मानसिक स्थिति को परिष्कृत करें. और उदार भाव से पूजा में समर्पित हों।
बताये गए काम नहीं करने चाहिए|
अशुद्ध रूप से पूजा: अशुद्ध हाथों से पूजा करना या अशुद्ध द्रव्यों का प्रयोग न करे।
अवज्ञा और अश्रद्धा: पूजा के समय अवज्ञा और अश्रद्धा का अभाव ना रखें।
अनुचित भावना: पूजा के दौरान नकारात्मक या अनुचित भावना को मन में न लाये|
अन्य क्रियाएँ: पूजा के दौरान अन्य किसी भी कार्य, जैसे कि बातचीत, मनोरंजन, या खानपान, नहीं करना चाहिए|
अव्यवस्थित सामग्री: पूजा के सामग्री को गलत तरीके ना रखे और इसका सही उपयोग कर।

इस कलयुग में घर में पूजा कब नहीं करनी चाहिए|
शास्त्रों के अनुसार, दोपहर में पूजा-पाठ नहीं करनी चाहिए. …
वहीं अगर आपने आरती कर ली है तो इसके बाद पूजा की विधि न करें. …
महिलाओं को ऐसे समय पर भी कभी पूजा-पाठ नहीं करना चाहिए, जब माहवारी चल रही हो. …
ऐसे समय में भी पूजा न करें जब घर पर सूतक और पातक लगा हो. …
इसके साथ ही ग्रहण आदि में भी पूजा-पाठ न करें.
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