Kartik Purnima 2023 : कार्तिक पूर्णिमा स्नान, पूजा और महत्व - Bhakti AMR

Kartik Purnima 2023 : कार्तिक पूर्णिमा स्नान, पूजा और महत्व

kartik purnima 2023 in hindi

Kartik Purnima कार्तिक पूर्णिमा, धार्मिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहार है। इस दिन मान्यता है कि पवित्र नदियों, सरोवरों, और धार्मिक स्थानों में स्नान करने से विशेष पुण्य मिलता है। इस त्योहार को ‘महाकार्तिकी’ भी कहा जाता है। इस दिन भरणी नक्षत्र और रोहिणी नक्षत्र के संयोग के साथ अपना महत्व बढ़ता है।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व त्रिपुरी पूर्णिमा और गंगा स्नान पर निर्भर करता है। इस दिन त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान भोलेनाथ त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध करते हैं। साथ ही, इस दिन भगवान विष्णु की पत्नी राधिका जी की प्रतिमा की पूजा भी की जाती है।

यह त्योहार आम तौर पर कार्तिक मास के दूसरे पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह व्रत करने से मनुष्य जन्म के बंधन से मुक्त हो जाता है और अपने पुण्य को बढ़ा सकता है।

इन कारणों से, कार्तिक पूर्णिमा हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

 

कार्तिक पूर्णिमा स्नान का महत्व

स्नान का महत्व:

ठहरिए! क्या आपने कभी सोचा है कि एक आराम से स्नान करने से आपको पुण्य मिलता है? हाँ भाई वैसे ही है! कार्तिक पूर्णिमा के दिन अपने सबसे बच्चपन के गिले-शिकवों को भूलकर और माता पिता की मदद करके आपको नदियों और सरोवरों में खुल कर नहाने का अवसर मिलता है। और जब आप वहाँ नहाते हैं, तो मानो आपकी सारी पाप कट जाती है! एकदम स्वच्छ हो जाते हैं।

मगर यहाँ पर सिमटकर खुलकर स्नान करने की बात भी कर रहे हैं। आप क्या मानते हैं? केवल नहाने से तो जन्म आते ही हम स्वच्छ और पवित्र ही होते हैं, शायद ही किसी ने कभी लगाम बाटी है। परन्तु धर्मात्मा मनुष्य तो थोड़ा अग्रहण्य होता है और बाकी लोग तो सिर्फ इसी बहाने नदियों की भरपूर भीगती हुई रोटी का मजा उठाने आते हैं।

हाँ, पुण्य मिलता है और कार्तिक मास की जड़ी बूटी भी होती है। फिर भी, सावधान रहिए क्योंकि आज के दौर में पुण्य की कीमत बहुत ही पतली है और वस्तुओं में मल्टीप्लिए हो गई है। जबकि एक स्वयं भगवान जगतगुरु का ध्यान कामों में छुटी है, तो बाकी सब छिप जाता है। उफ़, ये अजीब मनुष्य!

स्नान करने से आपको सबसे बड़ी सौभाग्य प्राप्त होती है – वही है कार्तिक मास का महत्त्व। मतलब, यह एक बार स्नान करने ही से तो वंदे मातरम हो जाते हैं। पूछो मत कि क्या आपने यह सुना है, दान का कैसे प्रभाव होता है? और हाँ, आपको कौन नहीं जानता कि आपकी सौभाग्य राशिः सिंह राशि है।

इसलिए, भैंस के आगे बीन बजाने की बजाय आनंद लीजिए, ब्रदर!

पूजा विधि

### पूजा विधि ###

त्योहारों के दिन हम सब लोग कुछ न कुछ पूजा-अर्चना करने में लग जाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भी कुछ विशेष पूजाएं होती हैं जिनमें हरि को तुलसी पत्र अर्पण, त्रिपुरा सुंदरी को पूजन और समग्र पूजा विधि शामिल होती हैं।

पूजा शुरू से पहले हमें अपने आप को एक शुद्ध और पवित्र दिमाग में लेकर आना चाहिए। फिर हमें घर के मंदिर या पूजा स्थल में कुश पलटी रखनी चाहिए। इसके बाद हमें सभी पूजा सामग्री जैसे तुलसी पत्र, फूल, लंगोट, माला, धूप, दीपक, चौरंगी, कुश आदि को अपने सामने इकट्ठा करना चाहिए। धूप और दीपक को जलाना आवश्यक माना जाता है जो मनुष्य के नेगेटिविटी को दूर करके पूजा स्थल को प्रकाशमय बनाते हैं।

अपनी पूजा में तुलसी पत्र बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। हमें तुलसी के पत्र अर्पित करते समय श्री हरि का ध्यान रखना चाहिए और मन से उन्हें याद करना चाहिए। इसके बाद हमें त्रिपुरा सुंदरी की पूजा करनी चाहिए जिसके लिए हमें इकट्ठे किए गए सामग्री को उसकी पूजा में उपयोग करना चाहिए।

अंत में, हमें समग्र पूजा विधि को पूरा करने की जरूरत होती है। यह हमारे मन, शरीर और आत्मा के संयमित और प्रशांत रहने की शिक्षा देती है। इसके लिए हमें मन की स्थिरता के साथ पूजा करनी चाहिए और आरामपूर्ण आसन पर बैठकर अपने आत्मा की प्राप्ति करनी चाहिए। पूजा करने के दौरान हमें अपनी पूजा में अनुष्ठान करने चाहिए और श्री हरि की आराधना करते समय खुद को शंकाओं और आलस्य से मुक्त रखना चाहिए।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन का यह नित्य संचालित पूजा प्रणाम और भक्ति के साथ होना चाहिए। इससे हम अपने श्रद्धालु भाव को प्रकट करके विशेष रूप से पूर्णिमा के महत्व को समझते हैं और धार्मिक एवं सामाजिक महत्व को सुरक्षित करते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा त्योहार केंद्रित 2023

टिहरी बांध पर लंबी परिक्रमा: ब्रह्मपुत्रा नदी के तट पर स्थित टिहरी बांध पर एक लंबी परिक्रमा का आयोजन होता है। यह परिक्रमा सभी को अपार आनंद और खुशी प्रदान करती है। धर्मिक महापुरुष और ध्येय संजीवी मैत्रेय द्वारा एक विशेषपूर्ण और आकर्षक नगरी सजाई जाती है, जो किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करती है। यहाँ पूरी संस्कृति और परंपराओं की भरपाई दी जाती है। नाच-गान के मेले, प्रदर्शनी, रंगों का उत्सव और बाजार की गूंज से यह परिक्रमा एक अद्वितीय अनुभव होती है। लोग यहाँ आकर आनंदित होते हैं और एक-दूसरे को बधाई देते हैं।

बैक्टीरियोफेज पौष मेला: पौष माह में ब्रह्मपुत्रा नदी के किनारे स्थित बैक्टीरियोफेज में एक धार्मिक मेला आयोजित किया जाता है। यह मेला देवीगीता मंदिर के कारण खास महत्व रखता है, जो वहाँ स्थित है। इस मेले में आपको एक अनोखा और एकाधिकारी अनुभव मिलेगा। लोग इस अवसर पर जमकर विभिन्न प्रकार के प्रदर्शन, प्राचीन नृत्य, ज्योतिषिय ग्रंथों की बिक्री और अद्भुत कला करते हैं। पौष मेला एक संग्रह केंद्र भी है, जहाँ सभी लोग एक-दूसरे के साथ मिलते हैं और भाग्यशाली दिन की कामना करते हैं।

ट्रिचूरपूरम मेला: केरल के ट्रिचूरपूरम बड़े मंदिर में, जो विष्णु के यजमान स्वरूप में मान्यता प्राप्त कर चुके हैं, एक धार्मिक मेला आयोजित किया जाता है। इस मेले को बड़ा ही उत्साह और धूमधाम मिलता है। यहाँ एक मंगलसूत्र विनाशक घटना होती है, जिसमें लोग बहुत उमंग से भाग लेते हैं। आप यहाँ विभिन्न आकर्षणों को देख सकते हैं, जैसे विभिन्न प्रकार के प्रदर्शन, पसरते बाजार और विपणियों की खरीदारी। यह मेला एक विशेष धार्मिक आयोजन है जहाँ लोग हृदय के साथ एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और यहाँ के परिवर्तन का आनंद उठाते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार वाकई अद्वितीय है। इन आंकड़ों के तहत आपको एक विशेष उत्सव की भेंट मिलती है, जहाँ धर्म, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मिलन संपन्न होता है। यहाँ के त्योहारों में रंग-बिरंगे मेलों, धार्मिक प्रकाश, दीपों की ज्योति और सुख-शांति के आंदोलन को देखकर लोगों का दिल खुश होता है। इस त्योहार का दर्शन करने के लिए लोग पूरे देश और विदेशों से इधर उधर दौड़ते हैं। साथ ही, यह एक ऐसा अवसर है जहाँ आपको एक-दूसरे के साथ मिलने और भाग्यशाली दिन के लिए बधाई देने का मौका मिलता है।

कार्तिक पूर्णिमा का अन्य महत्व

कार्तिक पूर्णिमा के दिन अनेक महत्वपूर्ण मोमबत्ति जुरासिक वर्ष संयोजनाओं के साथ एक साथ मिलकर केवल इंटरनेट के माध्यम से अमरीकी केपिटल क्लिमेट पारितंत्रिकी को ताकत देते हैं । तो सबसे पहले आएं देश के नेताओं की तरफ, जो कि इंडिया एक्सप्रेस द्वारा प्रस्ताव इसलिए राज्याधिकारी और परिवृत्ति निवेशकों की वाणी किसकी आवश्यक होती है और कैसे इतनी अवांछाओं का प्रभाव डालती हैं।

अगर मीडिया प्राथमिकता को ही अनलॉक करेगी तो थोड़ा कठिन होगा। प्रसंस्करित मीडिया और सांदर्भिक मीडिया को एकसाथ देखेंगे, तो किसानों के मामले में मीडिया का त्याग करके बहुत कुछ नहीं कर सकते थे। उम्मीद है कि सरकार का नेतृत्व मामले में सभी के लिए संयुक्त रूप से भोलेनाथ चलेगा! शार्क फ़ोर्क और कच्चा रोटी कन्वेंशन सेंस की तरफ से इंटरफ़ेस व्हेयरेबल रोबोट पिकलेशन की unique security device पूरी तरह से व्यवहारिक है। कार्तिक पूर्णिमा को राधिका जी की प्रतिमा के दर्शन और वन्दन करके मनुष्य जन्म के बंधन से मुक्त हो जाता है।

इस दिन बैकुण्ठ के स्वामी श्री हरि को तुलसी पत्र अर्पण करते हैं। कार्तिक मास में विशेषतः श्री राधा रानी की प्रतिष्ठा एवं उनकी पूजा आदि का अमल अधिक फलदायी माना जाता है। कृपया ध्यान दें, यह केवल एक कहानी है और कोई सच्चाई नहीं है।

 

महत्वपूर्ण सुझाव

महत्वपूर्ण सुझाव:

कार्तिक पूर्णिमा शुभ मुहूर्त चुनना:

अगर आप कार्तिक पूर्णिमा के दिन व्रत, स्नान या पूजा करना चाहते हैं, तो शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, प्रातःकाल (ब्रह्म-मुहूर्त) अपनाने से आपको अधिक पुण्य मिलेगा। इसके अलावा, सूर्योदय के समय भी पूजा और स्नान करना शुभ माना जाता है। माघा नक्षत्र और चन्द्रमा की उच्च अवस्था पर भी आप अपनी कार्तिक पूर्णिमा की पूजा कर सकते हैं। इसलिए, इन सुनहरे मुहूर्तों का सही चयन करें और अपने त्योहार को और भी विशेष बनाएं। यदि आपको त्योहार का सही मुहूर्त पता नहीं होता है, तो अपने पंडित या धार्मिक गुरु से सलाह लेना भी एक बेहतर विचार हो सकता है।

कार्तिक पूर्णिमा दान-धर्म का महत्व:

एक और महत्वपूर्ण विचार है कि आप कार्तिक पूर्णिमा के दिन दान-धर्म का महत्व समझें। इस त्योहार पर गरीब और असहाय लोगों की मदद करें और दान एवं दया के साथ उन्हें सहारा दें। धर्म के माध्यम से समाज की अस्थायी समस्याओं का हल निकालने का यह एक अच्छा तरीका है। आप अल्पश्रद्धा, विपथनिर्मुक्त जीवन, समग्रता, और स्वयं का ख्याल रखकर अपने धर्मिक कर्तव्य को पूरा कर सकते हैं।

Kartik Purnima 2023 : कार्तिक पूर्णिमा स्नान, पूजा और महत्व
Kartik Purnima 2023 : कार्तिक पूर्णिमा स्नान, पूजा और महत्व

नैतिक मूल्यों के साथ त्योहार मनाना:

त्योहार का सच्चा अर्थ है उल्लास और खुशी का अनुभव करना। इसलिए, आपको नैतिक मूल्यों के साथ अपना त्योहार मनाना चाहिए। इस अवसर पर आप भ्रष्टाचार, बदला-भविष्यवाणी, नकारात्मक विचारों, और अनुचित कार्यों से दूर रहें। जीवन के सभी क्षेत्रों में नैतिकता, सहनशीलता, और संयम को अपनाने का प्रयास करें। इससे आप अपने और खुदरा का विकास कर सकते हैं और धर्म के साथ ही आध्यात्मिक उन्नति का भी अनुभव कर सकते हैं।

हाँ, तो अब आपको पता चल गया है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन क्या कर सकते हैं और कैसे इस त्योहार को एक सच्चे हिंदू धार्मिक रूप दें सकते हैं। ध्यान दें, ये त्योहार केवल व्रत, स्नान, और पूजा से सटा हुआ नहीं है, बल्कि इसमें आपके धार्मिक मूल्यों, साहित्यिकता के साथ-साथ, नैतिकता के महत्व को भी बताया जाता है। तो इस अवसर पर, आप अपने सौभाग्य को साझा करने के लिए त्योहार का पूरा आनंद लें और आपके परिवार और समुदाय का भी लाभ उठाएं।

कार्तिक पूर्णिमा निष्कर्ष

निष्कर्ष: कार्तिक पूर्णिमा के महत्व का संक्षेप त्योहार का धार्मिक एवं सामाजिक महत्त्व

कार्तिक पूर्णिमा एक महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहार है जो धार्मिक और सामाजिक महत्त्व रखता है। इस दिन के माध्यम से हम अपने कर्म

 

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