Margadarsi Amavasya 2023 : श्रद्धांजलि का पर्व - Bhakti AMR

Margadarsi Amavasya 2023 : श्रद्धांजलि का पर्व

Margadarsi Amavasya

Margadarsi Amavasya मार्गशीर्ष अमावस्या हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि है जिसे धार्मिक कार्यों पितृपूजन ? दान के लिए शुभ माना जाता है ?

इस अमावस्या को भौमवती अमावस्या या धर्मराज अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है आइए इस लेख में मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में विस्तार से जानें।

अमावस्या का शुभ मुहूर्त

अमावस्या तिथि प्रारंभ:12 दिसंबर 2023सुबह 06:24 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त:13 दिसंबर 2023सुबह 05:01 बजे
धृति योग प्रारंभ:12 दिसंबर 2023शाम 04:52 बजे
धृति योग समाप्त:13 दिसंबर 2023शाम 06:52 बजे
Margadarsi Amavasya

अमावस्या का महत्व ?

पितृ पूजन मार्गशीर्ष अमावस्या को पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है ? इस दिन पितरों को तर्पण पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है?

आध्यात्मिक शुद्धि मार्गशीर्ष अमावस्या को स्नान ध्यान जप-तप और दान करने से आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती ? इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से भी विशेष लाभ मिलता है

सौभाग्य की प्राप्ति अमावस्या तिथि पर किए गए धार्मिक कार्यों से सौभाग्य की प्राप्ति होती ?और मनोकामनाएं पूर्ण होती ? इस दिन कुछ विशेष दान करने से भी जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

दुर्लभ योग का संयोग इस साल 2023 में मार्गशीर्ष अमावस्या पर दुर्लभ धृति योग का निर्माण हो रहा है? इस योग में किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

Margadarsi Amavasya

मार्गशीर्ष अमावस्या ? हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि है जो आध्यात्मिक शुद्धि पितृ पूजन और शुभ कार्यों के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है ? इस दिन को भौमवती अमावस्या या धर्मराज अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है ? आइए जानें इस अमावस्या के महत्व के बारे में विस्तार से:

1. पितृ पूजन:

मार्गशीर्ष अमावस्या को पितृ पक्ष का आरंभ माना जाता है ? इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन कर्मों से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और वे अपने वंशजों पर आशीर्वाद बरसाते हैं।

2. आध्यात्मिक शुद्धि:

  • इस दिन स्नान, ध्यान, जप-तप और दान करने से आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।
  • पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है।
  • ध्यान और जप-तप करने से मन एकाग्र होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

3. सौभाग्य और मनोकामना पूर्ति:

  • मार्गशीर्ष अमावस्या को सौभाग्य और मनोकामना पूर्ति के लिए भी शुभ माना जाता है।
  • इस दिन व्रत रखने और दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
  • कुछ विशेष दान करने से भी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Margadarsi Amavasya

4. दुर्लभ योग का संयोग:

  • इस वर्ष 2023 में मार्गशीर्ष अमावस्या पर दुर्लभ धृति योग का निर्माण हो रहा है।
  • इस योग में किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

5. आध्यात्मिक प्रथाओं के लिए अनुकूल:

  • इस दिन का वातावरण आध्यात्मिक प्रथाओं के लिए अनुकूल होता है।
  • कई लोग इस दिन मौन व्रत भी रखते हैं, जो आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक विकास में सहायक होता है।

6. प्रकृति के साथ जुड़ने का अवसर:

  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है।
  • यह प्रकृति के साथ जुड़ने और इसकी पवित्रता का अनुभव करने का एक अच्छा अवसर है।

7. सामाजिक दायित्वों को निभाने का अवसर:

  • इस दिन दान करने का विशेष महत्व है।
  • गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • इससे समाज में सद्भावना और सहयोग की भावना भी बढ़ती है।

मार्गशीर्ष अमावस्या आध्यात्मिकता, पितृ पूजन, शुभ कार्यों और सामाजिक दायित्वों को निभाने का एक विशेष अवसर प्रदान करती है। इस पवित्र दिन का सदुपयोग करें और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।

मार्गशीर्ष अमावस्या की पूजा विधि Margadarsi Amavasya

मार्गशीर्ष अमावस्या की पूजा विधि

कार्यविधि
स्नान और शुद्धिकरणप्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पितृ पूजनघर के मंदिर में पितरों का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। फिर गंगाजल, दूध, पुष्प, फल और तिल अर्पित करें। तर्पण और पिंडदान करें और पितरों के मंत्रों का जाप करें।
विष्णु पूजाभगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित करें और उन्हें पंचामृत, तुलसी और चंदन अर्पित करें।
दानअमावस्या के दिन गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों को दान करना चाहिए। कपड़े, खाद्य सामग्री, धन आदि का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
व्रतअमावस्या के दिन कुछ लोग व्रत भी रखते हैं। व्रत के दौरान फलाहार करें और सूर्यास्त के बाद भोजन करें।

मार्गशीर्ष अमावस्या की पूजा विधि का महत्व Margadarsi Amavasya

मार्गशीर्ष अमावस्या को पितृ पक्ष का आरंभ माना जाता है। इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

इस दिन स्नान, ध्यान, जप-तप और दान करने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है। इसलिए, मार्गशीर्ष अमावस्या का दिन एक विशेष अवसर है जब आप अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना कर सकते हैं और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी प्रयास कर सकते हैं।Margadarsi Amavasya

मार्गशीर्ष अमावस्या से जुड़ी मान्यताएं

  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं। इसलिए इस दिन उनका विधिपूर्वक पूजन करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से भी पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन किए गए दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए इस दिन दान-पुण्य करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने से

मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टि से है। इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व पितृ पूजन के लिए

मार्गशीर्ष अमावस्या को पितृ पक्ष का आरंभ माना जाता है। इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन कर्मों से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और वे अपने वंशजों पर आशीर्वाद बरसाते हैं।

मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व आध्यात्मिक शुद्धि के लिए Margadarsi Amavasya

मार्गशीर्ष अमावस्या को स्नान, ध्यान, जप-तप और दान करने के लिए भी विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस दिन ध्यान और जप-तप करने से आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।Margadarsi Amavasya

मार्गशीर्ष अमावस्या को आध्यात्मिक शुद्धि के लिए एक विशेष दिन माना जाता है। इस दिन स्नान, ध्यान, जप-तप और दान करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है और मन एकाग्र होता है।

स्नान:Margadarsi Amavasya

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

ध्यान:

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन ध्यान करने का भी विशेष महत्व है। ध्यान करने से मन शांत होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

जप-तप:

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन जप-तप करने से भी आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है। जप-तप करने से मन एकाग्र होता है और ईश्वर के प्रति समर्पण बढ़ता है।

दान:

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन दान करने का भी विशेष महत्व है। गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और समाज में सद्भावना बढ़ती है।

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन आध्यात्मिक शुद्धि के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर में भगवान विष्णु या किसी अन्य देवता की प्रतिमा स्थापित करें।
  • भगवान को गंगाजल, दूध, पुष्प, फल और तिल अर्पित करें।
  • ध्यान करें या कोई मंत्र जपें।
  • गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों को दान करें।

मार्गशीर्ष अमावस्या का यह पवित्र दिन आध्यात्मिक उन्नति और मन की शांति के लिए एक सुनहरा अवसर है।Margadarsi Amavasya

मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व सौभाग्य की प्राप्ति के लिए

मार्गशीर्ष अमावस्या को सौभाग्य की प्राप्ति के लिए भी शुभ माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही, इस दिन व्रत रखने से भी सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

मार्गशीर्ष अमावस्या से जुड़ी मान्यताएं

मार्गशीर्ष अमावस्या से जुड़ी कुछ मान्यताएं निम्नलिखित हैं:

  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं। इसलिए इस दिन उनका विधिपूर्वक पूजन करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से भी पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन किए गए दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए इस दिन दान-पुण्य करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने से मन एकाग्र होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन क्या करें?

मार्गशीर्ष अमावस्या की पूजा विधि

कार्यविधिमहत्व
स्नान और शुद्धिकरणपापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
पितृ पूजनपितरों की आत्मा की शांति होती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
विष्णु पूजाभगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
दानसमाज में सद्भावना और सहयोग की भावना बढ़ती है।
व्रतमन एकाग्र होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

अमावस्या की पूजा विधि का महत्व(Margadarsi Amavasya)

मार्गशीर्ष अमावस्या को पितृ पक्ष का आरंभ माना जाता ? इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है ? साथ ही, इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है ?Margadarsi Amavasya

इस दिन स्नान, ध्यान, जप-तप और दान करने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है। इसलिए, मार्गशीर्ष अमावस्या का दिन एक विशेष अवसर है जब आप अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना कर सकते हैं और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी प्रयास कर सकते हैं।Margadarsi Amavasya

विस्तृत पूजा विधि

अमावस्या के दिन क्या न करें ?

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन निम्नलिखित कार्य नहीं करने चाहिए:

  • इस दिन भोजन बनाना, खाना और दान करना वर्जित है।
  • इस दिन नए वस्त्र नहीं पहनने चाहिए।
  • इस दिन शराब, मांस और अन्य तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए।
  • इस दिन झूठ बोलना, क्रोध करना और अन्य पापकर्म करना वर्जित है।

मार्गशीर्ष अमावस्या एक महत्वपूर्ण धार्मिक तिथि है। इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

मार्गशीर्ष अमावस्या की पूजा विधि को विधिपूर्वक करने से हमें निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • हमारा मन एकाग्र होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
  • समाज में सद्भावना और सहयोग की भावना बढ़ती है।

आइए हम सभी मिलकर मार्गशीर्ष अमावस्या का दिन विधिपूर्वक मनाकर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना करें और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रयास करें।

अंत में, हम सभी से निवेदन है कि मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों को दान करें। इससे समाज में सद्भावना और सहयोग की भावना बढ़ती है और हमें पुण्य की प्राप्ति होती है।

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