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Sankashti Chaturthi : गणपति जी के आशीर्वाद से दूर हों कष्ट

Sankashti Chaturthi

Sankashti Chaturthi

Sankashti Chaturthi हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. भगवान गणेश को समर्पित इस व्रत को करने से कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और विघ्न बाधाओं से मुक्ति मिलती है.

आइए जानें इस पवित्र व्रत के महत्व, पूजा विधि और इस बार के शुभ मुहूर्त के बारे में.

गणपति मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

भजन

Sankashti Chaturthi व्रत से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं

पहली कथा:

एक बार देवताओं पर कई विपदाएं आ गईं। असुरों का आतंक, धन-धान्य का अभाव, और संकटों का सिलसिला बढ़ता ही गया। परेशान होकर देवता भगवान शिव के पास मदद मांगने पहुंचे। शिवजी ने उन्हें संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

देवताओं ने भगवान शिव की सलाह मानते हुए विधि-पूर्वक संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया। दिनभर उपवास रखा और शाम को चंद्रोदय के बाद भगवान गणेश की पूजा की। उनकी भक्ति और निष्ठा से प्रसन्न होकर गणेशजी ने प्रकट होकर सभी देवताओं के कष्ट दूर किए और उन्हें आशीर्वाद दिया। उसी समय से इस व्रत का महत्व बढ़ गया और मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

दूसरी कथा:

एक बार माता पार्वती अपने दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिकेय की बुद्धि और शक्ति की परीक्षा लेना चाहती थीं। उन्होंने घोषणा की कि जो सबसे पहले पृथ्वी का चक्कर लगाकर वापस आएगा, उसे एक बेशकीमती फल दिया जाएगा। कार्तिकेय अपने तुरंत वेग वाले वाहन मयूर पर सवार होकर तुरंत पृथ्वी का चक्कर लगाने निकल पड़े, जबकि गणेशजी अपने छोटे से वाहन मूषक पर धीरे-धीरे आगे बढ़े।

गणेशजी ने समझ लिया कि पृथ्वी का चक्कर लगाने के बजाय अपनी माता की ही प्रदक्षिणा करना अधिक फलदायी होगा। उन्होंने अपनी माता की सात बार प्रदक्षिणा की और लौट आए। माता पार्वती उनकी बुद्धि और भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें बेशकीमती फल दे दिया। इस घटना ने संकष्टी चतुर्थी के महत्व को और स्थापित किया।

ये दो मुख्य कथाएं हैं, हालांकि, क्षेत्र के आधार पर संकष्टी चतुर्थी से जुड़ी अन्य कथाएं भी प्रचलित हो सकती हैं। व्रत करते समय इन कथाओं को सुनना व्रत के महत्व और भगवान गणेश के आशीर्वाद को पाने में सहायक माना जाता है।

कृपया ध्यान दें कि किसी भी प्राचीन कथा में भिन्नताएं हो सकती हैं, इसलिए यहां प्रस्तुत कथाओं को एक संदर्भ के रूप में लें, और आपके क्षेत्र में प्रचलित कथाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त करें।

विघ्नहर्ता गणेश चरित

विघ्नहर्ता गणेश चरित, भगवान गणेश के जीवन और कार्यों पर आधारित एक विस्तृत और प्रचलित कथा है। इस कथा में उनके जन्म से लेकर विघ्नहर्ता (विघ्नों को दूर करने वाला) के रूप में उनकी भूमिका तक, विभिन्न घटनाओं का रोचक वर्णन मिलता है।

यहां विघ्नहर्ता गणेश चरित की कुछ प्रमुख घटनाओं का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:

जन्म और बचपन:

विघ्नहर्ता का उदय:

जीवन के अन्य महत्वपूर्ण कार्य: (Sankashti Chaturthi)

विघ्नहर्ता गणेश चरित की शिक्षाएं:

विघ्नहर्ता गणेश चरित एक प्रेरणादायक कहानी है जो हमें जीवन की चुनौतियों का सामना करने और सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। यह हमें यह भी सिखाती है कि कैसे हम अपनी बुद्धि और ज्ञान का उपयोग दूसरों की मदद करने और दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने में कर सकते हैं।

यदि आप विघ्नहर्ता गणेश चरित के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो आप विभिन्न पुस्तकों, धार्मिक ग्रंथों, या ऑनलाइन संसाधनों का अध्ययन कर सकते हैं। कई मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों में भी इस कथा का नाटकीय रूपांतरण प्रस्तुत किया जाता है।

मुझे आशा है कि यह संक्षिप्त विवरण आपको विघ्नहर्ता गणेश चरित के बारे में बुनियादी जानकारी प्रदान करता है। आप निश्चित रूपरूप से इस कहानी के बारे में और अधिक जानकर लाभ उठा सकते हैं।

संकष्टी चतुर्थी का महत्व:

Sankashti Chaturthi की पूजा विधि:

संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि

क्रमक्रिया
1सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
2गणपति जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
3पंचामृत, फूल, दुर्वा, फल आदि का भोग अर्पित करें।
4गणपति मंत्र का जाप करें और भजन गाएं।
5कथा सुनें या पढ़ें।
6व्रत का संकल्प लें।
7शाम को चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें।

पंचामृत (Sankashti Chaturthi)

कथा

इस बार के शुभ मुहूर्त:

संकष्टी चतुर्थी 2023 का शुभ मुहूर्त

कार्यसमय
व्रत प्रारंभसूर्योदय से
व्रत समापनचंद्र दर्शन के बाद
पूजा का मुहूर्तसुबह 9:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक
चंद्र दर्शन का समयशाम 7:54 बजे

नोट: इस बार संकष्टी चतुर्थी 30 नवंबर 2023 को है।

अन्य महत्वपूर्ण बातें: (Sankashti Chaturthi)

Sankashti Chaturthi की मान्यता

संकष्टी चतुर्थी, जिसे संकटहारा चतुर्थी और संकष्टी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक चंद्र माह में एक महत्वपूर्ण दिन है जो भगवान गणेश को समर्पित है। यह दिन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है।

संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है “असफलताओं को दूर करने वाला चौथा दिन”। इस दिन, भक्त भगवान गणेश की पूजा करते हैं और उनसे अपने सभी कष्टों और समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए प्रार्थना करते हैं।

संकष्टी चतुर्थी की मान्यताओं में शामिल हैं:

  1. इस दिन भगवान गणेश ने अपनी सूंड से समुद्र से अमृत कलश निकाला था।
  2. इस दिन भगवान गणेश ने रावण का वध किया था।
  3. इस दिन भगवान गणेश ने अपने माता-पिता का आशीर्वाद प्राप्त किया था।

संकष्टी चतुर्थी व्रत के कई लाभों के बारे में कहा जाता है, जिनमें शामिल हैं:

संकष्टी चतुर्थी व्रत करने के लिए, भक्त को सूर्योदय से पहले उठना चाहिए और स्नान करना चाहिए। फिर, वे एक साफ स्थान पर एक गणेश प्रतिमा स्थापित करें और उसे फूल, मिठाई, और अन्य प्रसाद अर्पित करें। भक्त गणेश की आरती और मंत्रों का जाप भी करते हैं।

संकष्टी चतुर्थी व्रत का समापन चंद्रोदय के बाद होता है। इस दिन, भक्त चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और फिर प्रसाद का वितरण करते हैं।

संकष्टी चतुर्थी भारत के कई हिस्सों में एक लोकप्रिय त्योहार है। इस दिन, भक्त मंदिरों में जाते हैं और गणेश की पूजा करते हैं। कई जगहों पर, विशेष रूप से महाराष्ट्र में, इस दिन गणेश मूर्तियों की स्थापना की जाती है और उन्हें अगले दिन तक पूजा जाता है।

संकष्टी चतुर्थी एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो हिंदू धर्म में गणेश की शक्ति और महत्व का जश्न मनाता है। यह एक दिन है जब भक्त भगवान गणेश से अपने सभी कष्टों और समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए प्रार्थना करते हैं।

निष्कर्ष: (Sankashti Chaturthi)

संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की कृपा पाने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने का एक पवित्र अवसर है. इस व्रत को करने से मन की शांति मिलती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है.

इसलिए इस पावन दिन को भगवान गणेश की आराधना के साथ मनाएं और उनके आशीर्वाद से अपना जीवन धन्य करें.

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