Utapanna_Ekadashi_Vrat 2023: जानें इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि - Bhakti AMR

Utapanna_Ekadashi_Vrat 2023: जानें इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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उत्पत्रा एकादशी क्या है: Utapanna_Ekadashi_Vrat

Utapanna_Ekadashi_Vrat एक हिन्दू धार्मिक त्योहार है जो हिन्दू पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस त्योहार को “प्रबोधिनी एकादशी” भी कहा जाता है। उत्पत्रा” का अर्थ होता है “उत्पन्न होना” या “उत्तेजित होना। इस दिन भगवान विष्णु की उत्पत्ति का वर्णन किया जाता है  

Utapanna_Ekadashi_Vrat
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उत्पत्रा एकादशी के दिन व्रत रहने वाले लोगो को सोना नहीं चाहिए और रातभर जागरण भगवान विष्णु के नाम का जागरण करना चाहिए। इस दिन विशेष प्रकार के पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, और दान-पुण्य का महत्व है। लोग विष्णु भगवान की पूजा करते हैं और उन्हें तुलसी पत्र, फल, फूल, और प्रसाद के रूप में अर्पित करते हैं।

उत्पत्रा एकादशी क्या है:
उत्पत्रा एकादशी के व्रत की विधि:
उत्पत्रा एकादशी और हिन्दू पौराणिक कथाएँ:
उत्पत्रा एकादशी के लाभ:
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उत्पत्रा एकादशी के व्रत की विधि Utapanna_Ekadashi_Vrat:

उत्पत्रा एकादशी का व्रत धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसे ध्यानपूर्वक और आदरपूर्वक मनाना जाता है।

1. पूर्वदृश्य (दिन परिनाम का अनुसरण: 

उत्पत्रा एकादशी का व्रत अगले दिन सुबह सूर्योदय से शुरू होता है। व्रती व्यक्ति को इसे आचरण करते हुए पूर्वदृश्य (व्रत की शुरुआत से पहले) अगले दिन सबेरे उठना चाहिए।

2. स्नान एवं विशेष पूजा :

व्रती को उत्पत्रा एकादशी के दिन स्नान करना चाहिए। इसके बाद विशेष पूजा के लिए समर्पित होना चाहिए। भगवान विष्णु की मूर्ति, तुलसी का पौध, और शालिग्राम का पूजन करना चाहिए।

3. उत्पत्रा एकादशी की कथा का सुनना: 

व्रती को उत्पत्रा एकादशी की कथा जरुर सुननी चाहिए। यह कथा भगवान विष्णु की उत्पत्ति के संबंध में है और इसे सुनकर व्रती अपने मन में भक्ति और श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।

4. व्रत का समापन:

उत्पत्रा एकादशी का व्रत दोपहर में समाप्त होता है। इस समय पर व्रती को तुलसी के पत्ते, फल, और पूजा से प्राप्त किए गए प्रसाद का सेवन करना चाहिए।

5. निराहार रहना (व्रत की समाप्ति):

उत्पत्रा एकादशी के व्रत का समापन निराहार रहकर होता है। व्रती को दोपहर में आलू, शाकाहारी आदि नहीं खाना चाहिए। इसके बाद ही उत्पत्रा एकादशी का व्रत समाप्त होता है।

Utapanna_Ekadashi_Vrat
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उत्पत्रा एकादशी और हिन्दू पौराणिक कथाएँ Utapanna_Ekadashi_Vrat:

उत्पत्रा एकादशी के साथ कई हिन्दू पौराणिक कथाएँ जुड़ी हैं, जो इस त्योहार को और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं। 

1. भगवान विष्णु की उत्पत्ति कथा:

एक पौराणिक कथा के अनुसार, उत्पत्रा एकादशी के दिन भगवान विष्णु ने उत्तरीतीर्थ नामक स्थान पर पृथ्वी पर अवतार लिया था। उन्होंने एक ब्राह्मण के रूप में आकर राजा का उपदेश दिया और लोगों को धर्मपथ पर चलने के लिए प्रेरित किया। इस उत्पत्रा एकादशी के दिन को मनाने से व्रती भगवान विष्णु के आदर्श जीवन का पुरुषार्थ करते हैं।

2. हरिशयानी एकादशी कथा:

इस कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने शुक्राचार्य को उनके आश्रम में आमंत्रित किया था। शुक्राचार्य ने अपने आश्रम में गए बिना ही अपने शिष्य बलि राजा को पूजन करने का आदान-प्रदान कर दिया। इससे भगवान विष्णु नरक लोक में जा पहुंचे, और उन्होंने अपने वाहन गरुड़ के साथ हरिशयानी एकादशी के दिन अपने आश्रम पर विराजमान होकर शुक्राचार्य को आशीर्वाद दिया।

3. उत्तान एकादशी कथा:

इस कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने शेषनाग के सिर पर जागरूक होकर ब्रह्मा के साथ चर्चा की कि कैसे असुरराज बली को मारा जा सके। उन्होंने श्रीकृष्ण द्वारा सुग्रीव को अपने साथ मिलकर बली का वध करने का सुझाव दिया और उसी दिन को उत्तान एकादशी कहा गया।

उत्पत्रा एकादशी के लाभ Utapanna_Ekadashi_Vrat:

उत्पत्रा एकादशी का व्रत मानव जीवन में विभिन्न प्रकार के लाभ प्रदान कर सकता है? जो आध्यात्मिक, शारीरिक, और मानसिक स्वास्थ्य के पहलुओं को समृद्धि प्रदान कर सकते हैं।

1. आध्यात्मिक लाभ Utapanna_Ekadashi_Vrat:

  1. उत्पत्रा एकादशी के दिन विशेष पूजा और ध्यान के माध्यम से व्रती अपने आत्मा की शुद्धि की दिशा में काम होता हैं।
  2. इस व्रत से जुड़ी पौराणिक कथाएं व्यक्ति को आध्यात्मिक जागरूकता प्रदान करती हैं? और उसे धार्मिक तत्त्वों की समझने  में मदद करती हैं।

2. शारीरिक लाभ Utapanna_Ekadashi_Vrat:

  1. उत्पत्रा एकादशी का व्रत रखने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
  2. व्रत के दौरान उपवास और सात्विक आहार की आदतें बनती हैं? जो शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करती हैं।

3. मानसिक लाभ Utapanna_Ekadashi_Vrat:

  1. ध्यान, मन्त्र जाप, और पूजा के द्वारा उत्पत्रा एकादशी का आचरण करने से मानसिक शांति और आत्मशुद्धि का अनुभव होता है।
  2. धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भाग लेने से भक्ति और आत्मा के साथ संबंध स्थापित होता है? जो मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करता है।

4. समाज में सामंजस्य Utapanna_Ekadashi_Vrat:

  1. उत्पत्रा एकादशी के व्रत के माध्यम से व्यक्ति धार्मिक समाज में एकता और सामंजस्य की भावना का साझा करता है।
  2. व्रत के दौरान लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर पूजा, कीर्तन, और दान-पुण्य कार्यों में सहयोग करते हैं? जिससे समाज में एकता और प्रेम की भावना बनी रहे।

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